हर तरफ ग़मगीन नज़ारे थे
हर तरफ जिंदगी के कुछ और ही इशारे थेहर तरफ था सुर्ख लाल
हर तरफ थी जिंदगी जमी को चूम
वक्त के अजब खेल मे
हर तरफ मौत का तांडव था
अपनों से दूर मै मौत के करीब था
जहा थी हर आँख नम
और थी वो सुबह बेरंग
हर तरफ मौत का मंज़र था
जहा ना खुशी थी और ना ही आंसू थे,
था बस मौत का गम
जिंदगी को उम्मीद हमने बंधाई थी
हम तेरा साथ न छोड़ेंगे
साँसे हमारी रुक गयी तो क्या
जीना हम न छोडेंगे
By ;
Gagan Bhambry Date : Dec-4th-08
हर तरफ थी जिंदगी जमी को चूम
वक्त के अजब खेल मे
हर तरफ मौत का तांडव था
अपनों से दूर मै मौत के करीब था
जहा थी हर आँख नम
और थी वो सुबह बेरंग
हर तरफ मौत का मंज़र था
जहा ना खुशी थी और ना ही आंसू थे,
था बस मौत का गम
जिंदगी को उम्मीद हमने बंधाई थी
हम तेरा साथ न छोड़ेंगे
साँसे हमारी रुक गयी तो क्या
जीना हम न छोडेंगे
By ;
Gagan Bhambry Date : Dec-4th-08
Bahut badiya....wah wah wah!!!
ReplyDelete