Wednesday, June 9, 2010

जिदगी की शुरुवात हमने
इस मंजिल के लिए तो नहीं की थी
सुबह के इंतजार मै अँधेरे की उम्मीद तो नहीं की थी
क्या पता था इस मोड़ पे आकर ठहर जाएगी
वरना आगाज़ मे हमने इस अंजाम की उम्मीद तो नहीं की थी .. .
जिंदगी कभी तो बेहतर वक्त दिखाएगी
हमारे भी रास्तो पे
खुशियों की बहार बरसायेगी
बेवफा ज़िन्दगी नहीं
दुनिया है मेरे दोस्त
जो हमारे फूलो के रास्तो
पर भी अपने काटे बिछाएगी

मेरी जिंदगी

मै चलते चलते
कहा आ गया
राह मे दो पल
रुका तो था
पर वक्त की चाल
ने मुझे फिर चला दिया .

जिंदगी मुझे ले कर
कुछ य़ू आगे बड़ी
मै राह के हर
मोड़ भूल चला

राही बहुत से
मिले राह मे
पर साथ चलने वाले ने
साथ छोड़ दिया .

और मै राह में कुछ
इस तरह भटका
की राही मंजिल
सब भूल गया

मै चलते चलते
कहा आ गया ..........

Saturday, June 5, 2010

Rain Drop

One Day outside my window,
I saw the rain,
Thought to catch a drop
But all went in vain.

Drop by drop
It all went down.
Just to catch a drop
I went running around

Each drop of rain
I thought would catch,
Same like my dreams
Which were never detached.

By-- Gagan Bhambry