Tuesday, June 28, 2011

सावन

बेवजह आसुओं की कतारों में खड़े थे हम
और ख़ुशी हमसे गैरो का पता पूछ गयी
गम में हमारे शरीकेहयात हुआ सावन
मगर आँखों में अटक गया है
कुछ हिचकी सी हुई
मगर हमने खुद को रोका हुआ है ....

शरीकेहयात = हमसफ़र Gagan ... June-27th-11

Tuesday, February 15, 2011

वक्त

वक्त

हरे भरे अम्बोरियो
से लदे हुए
एक पेड़ को
एक दिन मैंने कुछ
झुका हुआ सा पाया
पुछा जो उससे कारण
तो उसने कुछ रुका हुआ सा बताया

बोला अम्बोरिया है ज्यादा
और पानी है कम
कुछ अम्बोरिया
इसी गम मै छोड़ गयी मेरा साथ
बाकि बची अम्बोरिया भी कुछ दूर
देंगी साथ .

पता होता मुझको अगर
होगा कुछ यू
तो संभाल के रखता पानी
और मरता ना मै यू

अम्बोरिया = बच्चे
पेड = पिता
पानी = पैसा

गगन
१३ फ़रवरी 2011