Tuesday, June 28, 2011

सावन

बेवजह आसुओं की कतारों में खड़े थे हम
और ख़ुशी हमसे गैरो का पता पूछ गयी
गम में हमारे शरीकेहयात हुआ सावन
मगर आँखों में अटक गया है
कुछ हिचकी सी हुई
मगर हमने खुद को रोका हुआ है ....

शरीकेहयात = हमसफ़र Gagan ... June-27th-11

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